Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2059 2059 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2059 कब है?
2059 में दो बार
शुक्रवार 10 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 10 जनवरी का पूरा पंचांगमंगलवार 30 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 30 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शनिवार 11 जनवरी
बुधवार 31 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शुक्र 10 जनवरी
-
05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 11 जनवरी
-
05:47–09:26पारण समयव्रत खोलने का समय
मंगल 30 दिसंबर
-
05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 31 दिसंबर
-
05:40–15:00पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शुक्र 10 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शुक्र 10 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 11:46 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 11:46 गुरु से 11:00 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 10 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:46: शुक्र 10 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 11:46 गुरु पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शनि 11 जनवरी, 05:47–09:26
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 10 जनवरी 11:00 से शनि 11 जनवरी 09:26 तक है; हरिवासर 16:37 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 11 जनवरी को सूर्योदय (05:47) से होता है।
मंगल 30 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी मंगल 30 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:23 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:23 सोम से 14:02 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 30 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:39: मंगल 30 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:23 सोम पर, उससे (04:03–05:39) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 31 दिसंबर, 05:40–15:00
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 30 दिसंबर 14:02 से बुध 31 दिसंबर 15:00 तक है; हरिवासर 20:17 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 31 दिसंबर को सूर्योदय (05:40) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।