Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2057 2057 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2057 कब है?
2057 में दो बार
सोमवार 1 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 1 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 22 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 22 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 2 जनवरी
रविवार 23 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
सोम 1 जनवरी
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05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 2 जनवरी
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05:42–16:28पारण समयव्रत खोलने का समय
शनि 22 दिसंबर
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05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 23 दिसंबर
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05:36–08:31पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
सोम 1 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी सोम 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:20 रवि से 19:33 तक।
एकादशी 19:33 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: सोम 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:20 रवि पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 2 जनवरी, 05:42–16:28
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 1 जनवरी 19:33 से मंगल 2 जनवरी 16:28 तक है; हरिवासर 00:47 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 2 जनवरी को सूर्योदय (05:42) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं।
शनि 22 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 22 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:51 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:51 शुक्र से 11:01 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 22 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: शनि 22 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:51 शुक्र पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 23 दिसंबर, 05:36–08:31
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 22 दिसंबर 11:01 से रवि 23 दिसंबर 08:31 तक है; हरिवासर 16:24 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 23 दिसंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।