Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2046 2046 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2046 कब है?
2046 में दो बार
मंगलवार 2 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 2 जनवरी का पूरा पंचांगरविवार 23 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 23 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 3 जनवरी
सोमवार 24 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 2 जनवरी
-
05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 3 जनवरी
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05:42–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
रवि 23 दिसंबर
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05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 24 दिसंबर
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05:36–13:20पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 2 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 2 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:00 से 23:24 तक।
एकादशी 23:24 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 2 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: मंगल 2 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:00 पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 3 जनवरी, 05:42–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 2 जनवरी 23:24 से बुध 3 जनवरी 23:13 तक है; हरिवासर 05:21 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 3 जनवरी को सूर्योदय (05:42) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:20 तक, करते हैं।
रवि 23 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी रवि 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:06 शनि से 15:42 तक।
एकादशी 15:42 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: रवि 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:06 शनि पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 24 दिसंबर, 05:36–13:20
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 23 दिसंबर 15:42 से सोम 24 दिसंबर 13:20 तक है; हरिवासर 21:06 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 24 दिसंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:14 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।