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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2038 2038 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 2038 कब है?

2038 में दो बार

शुक्रवार 1 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 1 जनवरी का पूरा पंचांग

बुधवार 22 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 22 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 2 जनवरी

पारण समय
05:41–14:04
8 घं 23 मि

गुरुवार 23 दिसंबर

पारण समय
05:36–07:29
1 घं 53 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शुक्र 1 जनवरी

  • 05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 2 जनवरी
  • 05:41–14:04पारण समयव्रत खोलने का समय

बुध 22 दिसंबर

  • 05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 23 दिसंबर
  • 05:36–07:29पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शुक्र 1 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शुक्र 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:48 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:48 गुरु से 15:50 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: शुक्र 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:48 गुरु पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 2 जनवरी, 05:41–14:04

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 1 जनवरी 15:50 से शनि 2 जनवरी 14:04 तक है; हरिवासर 21:24 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 2 जनवरी को सूर्योदय (05:41) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:19 तक, करते हैं।

बुध 22 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी बुध 22 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 13:20 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 13:20 मंगल से 10:33 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 22 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: बुध 22 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 13:20 मंगल पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 23 दिसंबर, 05:36–07:29

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 22 दिसंबर 10:33 से गुरु 23 दिसंबर 07:29 तक है; हरिवासर 15:47 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 23 दिसंबर को सूर्योदय (05:36) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।