Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2035 2035 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2035 कब है?
2035 में दो बार
गुरुवार 4 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 4 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 24 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 24 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 5 जनवरी
मंगलवार 25 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 4 जनवरी
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05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 5 जनवरी
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09:36–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सोम 24 दिसंबर
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05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 25 दिसंबर
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09:36–18:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 4 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 4 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:20 से 02:57 शुक्र तक।
एकादशी 02:57 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 00:20 गुरु से 02:57 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 4 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: गुरु 4 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:20 पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 5 जनवरी, 09:36–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 5 जनवरी 02:57 से शनि 6 जनवरी 05:33 तक है; हरिवासर 09:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:21 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
सोम 24 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 24 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 02:01 से 03:12 मंगल तक।
एकादशी 03:12 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 02:01 सोम से 03:12 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 24 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: सोम 24 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 02:01 पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 25 दिसंबर, 09:36–18:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 25 दिसंबर 03:12 से बुध 26 दिसंबर 04:49 तक है; हरिवासर 09:36 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।