Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2032 2032 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2032 कब है?
2032 में दो बार
स्मार्त
गुरुवार 8 जनवरी
वैष्णव
शुक्रवार 9 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 8 जनवरी का पूरा पंचांगमंगलवार 28 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 28 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शुक्रवार 9 जनवरी
वैष्णव · शनिवार 10 जनवरी
बुधवार 29 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 8 जनवरी
स्मार्त
- गुरुवार 8 जनवरी
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05:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 9 जनवरी
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10:53–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शुक्रवार 9 जनवरी
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05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 10 जनवरी
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05:46–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
मंगल 28 दिसंबर
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05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 29 दिसंबर
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05:39–11:33पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 8 जनवरी और शुक्र 9 जनवरी क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी गुरु 8 जनवरी को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शुक्र 9 जनवरी को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:58 से। एकादशी: 06:58 से 05:27 शुक्र तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:27 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:58 गुरु से 05:27 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह गुरु 8 जनवरी को 06:58 पर, उस सूर्योदय (05:45) के बाद, लगती है और शुक्र 9 जनवरी को 05:27 पर, अगले सूर्योदय (05:46 शुक्र) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: गुरु 8 जनवरी।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। गुरु 8 जनवरी को अरुणोदय (04:09–05:45) में दशमी है। शुक्र 9 जनवरी को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:27 तक, फिर द्वादशी): शुक्र 9 जनवरी।
व्रत का पारण
स्मार्त · शुक्र 9 जनवरी, 10:53–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 9 जनवरी 05:27 से शनि 10 जनवरी 03:11 तक है; हरिवासर 10:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:23 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शनि 10 जनवरी, 05:46–18:53 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शनि 10 जनवरी को 03:11 पर, रात में, अरुणोदय (04:10) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:46) से सूर्यास्त (18:53) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
मंगल 28 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी मंगल 28 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:41 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:41 सोम से 11:31 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 28 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:39: मंगल 28 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:41 सोम पर, उससे (04:03–05:39) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 29 दिसंबर, 05:39–11:33
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 28 दिसंबर 11:31 से बुध 29 दिसंबर 11:33 तक है; हरिवासर 17:32 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 29 दिसंबर को सूर्योदय (05:39) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।