Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2030 शुक्र 20 दिसंबर या शनि 21 दिसंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2030 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 20 दिसंबर
वैष्णव
शनिवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शुक्र 20 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 21 दिसंबर
वैष्णव · रविवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 20 दिसंबर
-
05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 21 दिसंबर
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09:20–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 21 दिसंबर
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05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 22 दिसंबर
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05:35–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में सफला एकादशी शुक्र 20 दिसंबर या शनि 21 दिसंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी शुक्र 20 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 21 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:20 से। एकादशी: 06:20 से 04:03 शनि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 04:03 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 06:20 शुक्र से 04:03 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 20 दिसंबर को 06:20 पर, उस सूर्योदय (05:34) के बाद, लगती है और शनि 21 दिसंबर को 04:03 पर, अगले सूर्योदय (05:35 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 20 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 20 दिसंबर को अरुणोदय (03:58–05:34) में दशमी है। शनि 21 दिसंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:03 तक, फिर द्वादशी): शनि 21 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 21 दिसंबर, 09:20–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 21 दिसंबर 04:03 से रवि 22 दिसंबर 01:11 तक है; हरिवासर 09:20 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 22 दिसंबर, 05:35–18:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 22 दिसंबर को 01:11 पर, रात में, अरुणोदय (03:59) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:35) से सूर्यास्त (18:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।