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Sevan, गेघार्कुनिक प्रांत, आर्मेनिया में सफला एकादशी 2027 2027 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC+4 में

Sevan में सफला एकादशी 2027 कब है?

2027 में दो बार

रविवार 3 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में रवि 3 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 23 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Sevan में गुरु 23 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 4 जनवरी

पारण समय
08:23–16:46
8 घं 23 मि

शुक्रवार 24 दिसंबर

पारण समय
08:21–17:37
9 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

रवि 3 जनवरी

  • 08:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 4 जनवरी
  • 08:23–16:46पारण समयव्रत खोलने का समय

गुरु 23 दिसंबर

  • 08:20व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 24 दिसंबर
  • 08:21–17:37पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

रवि 3 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी रवि 3 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:54 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:54 शनि से 14:38 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 3 जनवरी को सूर्योदय पर है, 08:23: रवि 3 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:54 शनि पर, उससे (06:47–08:23) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 4 जनवरी, 08:23–16:46

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 3 जनवरी 14:38 से सोम 4 जनवरी 16:46 तक है; हरिवासर 21:10 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 4 जनवरी को सूर्योदय (08:23) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:16 तक, करते हैं।

गुरु 23 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 23 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:11 बुध से 21:42 तक।

एकादशी 21:42 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 23 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 08:20: गुरु 23 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:11 बुध पर, उससे (06:44–08:20) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 24 दिसंबर, 08:21–17:37 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 23 दिसंबर 21:42 से शुक्र 24 दिसंबर 21:38 तक है; हरिवासर 03:41 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 24 दिसंबर को सूर्योदय (08:21) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:37) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 10:12 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।