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Pāthardi, महाराष्ट्र में सफला एकादशी 2021 2021 में 2 तारीख़ें

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में सफला एकादशी 2021 कब है?

2021 में दो बार

शनिवार 9 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में शनि 9 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 30 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में गुरु 30 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 10 जनवरी

पारण समय
07:05–16:53
9 घं 48 मि

शुक्रवार 31 दिसंबर

पारण समय
07:02–10:40
3 घं 38 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शनि 9 जनवरी

  • 07:04व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 10 जनवरी
  • 07:05–16:53पारण समयव्रत खोलने का समय

गुरु 30 दिसंबर

  • 07:01व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 31 दिसंबर
  • 07:02–10:40पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शनि 9 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शनि 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:40 शुक्र से 19:17 तक।

एकादशी 19:17 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 07:04: शनि 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:40 शुक्र पर, उससे (05:28–07:04) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 10 जनवरी, 07:05–16:53

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 9 जनवरी 19:17 से रवि 10 जनवरी 16:53 तक है; हरिवासर 00:41 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 10 जनवरी को सूर्योदय (07:05) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:17 तक, करते हैं।

गुरु 30 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 30 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:12 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:12 बुध से 13:40 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 30 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 07:01: गुरु 30 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:12 बुध पर, उससे (05:25–07:01) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 31 दिसंबर, 07:02–10:40

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 30 दिसंबर 13:40 से शुक्र 31 दिसंबर 10:40 तक है; हरिवासर 18:55 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 31 दिसंबर को सूर्योदय (07:02) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।