Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2021 2021 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 2021 कब है?
2021 में दो बार
शनिवार 9 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 9 जनवरी का पूरा पंचांगस्मार्त
बुधवार 29 दिसंबर
वैष्णव
गुरुवार 30 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 29 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 10 जनवरी
स्मार्त · गुरुवार 30 दिसंबर
वैष्णव · शुक्रवार 31 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शनि 9 जनवरी
-
05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 10 जनवरी
-
05:47–08:23पारण समयव्रत खोलने का समय
बुध 29 दिसंबर
स्मार्त
- बुधवार 29 दिसंबर
-
05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 30 दिसंबर
-
10:25–18:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 30 दिसंबर
-
05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 31 दिसंबर
-
05:40–18:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शनि 9 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शनि 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 13:10 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 13:10 शुक्र से 10:47 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:46: शनि 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 13:10 शुक्र पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 10 जनवरी, 05:47–08:23
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 9 जनवरी 10:47 से रवि 10 जनवरी 08:23 तक है; हरिवासर 16:11 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 10 जनवरी को सूर्योदय (05:47) से होता है।
बुध 29 दिसंबर और गुरु 30 दिसंबर क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी बुध 29 दिसंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव गुरु 30 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:42 से। एकादशी: 07:42 से 05:10 गुरु तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:10 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 07:42 बुध से 05:10 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह बुध 29 दिसंबर को 07:42 पर, उस सूर्योदय (05:39) के बाद, लगती है और गुरु 30 दिसंबर को 05:10 पर, अगले सूर्योदय (05:40 गुरु) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: बुध 29 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 29 दिसंबर को अरुणोदय (04:03–05:39) में दशमी है। गुरु 30 दिसंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 05:10 तक, फिर द्वादशी): गुरु 30 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 30 दिसंबर, 10:25–18:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 30 दिसंबर 05:10 से शुक्र 31 दिसंबर 02:10 तक है; हरिवासर 10:25 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:18 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 31 दिसंबर, 05:40–18:51 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 31 दिसंबर को 02:10 पर, रात में, अरुणोदय (04:04) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:40) से सूर्यास्त (18:51) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।