दिफ्फा, नाइजर में सफला एकादशी 2021 2021 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय WAT में
दिफ्फा में सफला एकादशी 2021 कब है?
2021 में दो बार
शनिवार 9 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
दिफ्फा में शनि 9 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 30 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
दिफ्फा में गुरु 30 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 10 जनवरी
शुक्रवार 31 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शनि 9 जनवरी
-
06:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 10 जनवरी
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06:35–12:23पारण समयव्रत खोलने का समय
गुरु 30 दिसंबर
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06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 31 दिसंबर
-
04:55–06:10पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शनि 9 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शनि 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:10 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:10 शुक्र से 14:47 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:34: शनि 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:10 शुक्र पर, उससे (04:58–06:34) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 10 जनवरी, 06:35–12:23
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 9 जनवरी 14:47 से रवि 10 जनवरी 12:23 तक है; हरिवासर 20:11 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 10 जनवरी को सूर्योदय (06:35) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:52 तक, करते हैं।
गुरु 30 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 30 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 11:42 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 11:42 बुध से 09:10 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+1)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 30 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:31: गुरु 30 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 11:42 बुध पर, उससे (04:55–06:31) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 31 दिसंबर, 04:55–06:10 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 31 दिसंबर को 06:10 पर, अरुणोदय (04:55) लगने के बाद और सूर्योदय (06:31) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।