Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2019 2019 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 2019 कब है?
2019 में दो बार
मंगलवार 1 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 1 जनवरी का पूरा पंचांगरविवार 22 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 22 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 2 जनवरी
सोमवार 23 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 1 जनवरी
-
06:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 2 जनवरी
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06:41–18:40पारण समयव्रत खोलने का समय
रवि 22 दिसंबर
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05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 23 दिसंबर
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03:59–05:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 1 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:46 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:46 सोम से 17:58 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:41: मंगल 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:46 सोम पर, उससे (05:05–06:41) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 2 जनवरी, 06:41–18:40
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 जनवरी 17:58 से बुध 2 जनवरी 18:40 तक है; हरिवासर 00:09 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 2 जनवरी को सूर्योदय (06:41) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:19 तक, करते हैं।
रवि 22 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी रवि 22 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:45 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:45 शनि से 06:52 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 22 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: रवि 22 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:45 शनि पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 23 दिसंबर, 03:59–05:12 (अरुणोदय से, Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 23 दिसंबर को 05:12 पर, अरुणोदय (03:59) लगने के बाद और सूर्योदय (05:35) से पहले, समाप्त होती है। द्वादशी छोटी हो तो निर्णयसिंधु, मत्स्य पुराण के अनुसार, पारण भोर में, द्वादशी समाप्त होने से पहले कराता है। Tithika इसे अरुणोदय से आरंभ करता है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।