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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2016 2016 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 2016 कब है?

2016 में दो बार

मंगलवार 5 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 5 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 24 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 24 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 6 जनवरी

पारण समय
06:44–19:52
13 घं 8 मि · Tithika की परिपाटी

रविवार 25 दिसंबर

पारण समय
06:37–19:48
13 घं 11 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

मंगल 5 जनवरी

  • 06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 6 जनवरी
  • 06:44–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

शनि 24 दिसंबर

  • 06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 25 दिसंबर
  • 06:37–19:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

मंगल 5 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी मंगल 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:43 सोम से 23:24 तक।

एकादशी 23:24 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:43: मंगल 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:43 सोम पर, उससे (05:07–06:43) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 6 जनवरी, 06:44–19:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 5 जनवरी 23:24 से गुरु 7 जनवरी 00:24 तक है; हरिवासर 05:39 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 6 जनवरी को सूर्योदय (06:44) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:21 तक, करते हैं।

शनि 24 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 24 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:24 शुक्र से 20:02 तक।

एकादशी 20:02 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 24 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:36: शनि 24 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:24 शुक्र पर, उससे (05:00–06:36) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 25 दिसंबर, 06:37–19:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 24 दिसंबर 20:02 से रवि 25 दिसंबर 22:37 तक है; हरिवासर 02:40 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 25 दिसंबर को सूर्योदय (06:37) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:15 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।