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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2008 2008 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 2008 कब है?

2008 में दो बार

गुरुवार 3 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 3 जनवरी का पूरा पंचांग

सोमवार 22 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में सोम 22 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शुक्रवार 4 जनवरी

पारण समय
09:05–19:52
10 घं 47 मि · Tithika की परिपाटी

मंगलवार 23 दिसंबर

पारण समय
07:01–19:47
12 घं 46 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

गुरु 3 जनवरी

  • 06:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 4 जनवरी
  • 09:05–19:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

सोम 22 दिसंबर

  • 06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 23 दिसंबर
  • 07:01–19:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

गुरु 3 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी गुरु 3 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 23:56 बुध से 02:30 शुक्र तक।

एकादशी 02:30 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 3 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:42: गुरु 3 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 23:56 बुध पर, उससे (05:06–06:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 4 जनवरी, 09:05–19:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 4 जनवरी 02:30 से शनि 5 जनवरी 04:51 तक है; हरिवासर 09:05 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:20 तक, करते हैं।

सोम 22 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी सोम 22 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 22:39 रवि से 00:28 मंगल तक।

एकादशी 00:28 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 22 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:35: सोम 22 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 22:39 रवि पर, उससे (04:59–06:35) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 23 दिसंबर, 07:01–19:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 23 दिसंबर 00:28 से बुध 24 दिसंबर 02:40 तक है; हरिवासर 07:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:14 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।