Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2005 2005 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 2005 कब है?
2005 में दो बार
गुरुवार 6 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 6 जनवरी का पूरा पंचांगमंगलवार 27 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 27 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 7 जनवरी
बुधवार 28 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 6 जनवरी
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06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 7 जनवरी
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06:45–19:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
मंगल 27 दिसंबर
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06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 28 दिसंबर
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06:38–08:04पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 6 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:57 से 23:50 तक।
एकादशी 23:50 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:44: गुरु 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:57 पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 7 जनवरी, 06:45–19:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 6 जनवरी 23:50 से शुक्र 7 जनवरी 21:02 तक है; हरिवासर 05:08 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 7 जनवरी को सूर्योदय (06:45) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:22 तक, करते हैं।
मंगल 27 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी मंगल 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:02 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:02 सोम से 08:59 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:38: मंगल 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:02 सोम पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 28 दिसंबर, 06:38–08:04
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 27 दिसंबर 08:59 से बुध 28 दिसंबर 08:04 तक है; हरिवासर 14:45 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 28 दिसंबर को सूर्योदय (06:38) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।