Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2002 2002 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 2002 कब है?
2002 में दो बार
बुधवार 9 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 9 जनवरी का पूरा पंचांगस्मार्त
रविवार 29 दिसंबर
वैष्णव
सोमवार 30 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 29 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 10 जनवरी
स्मार्त · सोमवार 30 दिसंबर
वैष्णव · मंगलवार 31 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
बुध 9 जनवरी
-
06:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 10 जनवरी
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06:46–09:37पारण समयव्रत खोलने का समय
रवि 29 दिसंबर
स्मार्त
- रविवार 29 दिसंबर
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06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 30 दिसंबर
-
08:10–19:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 30 दिसंबर
-
06:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 31 दिसंबर
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06:40–19:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
बुध 9 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी बुध 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:29 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:29 मंगल से 09:50 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:46: बुध 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:29 मंगल पर, उससे (05:10–06:46) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 10 जनवरी, 06:46–09:37
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 9 जनवरी 09:50 से गुरु 10 जनवरी 09:37 तक है; हरिवासर 15:47 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 10 जनवरी को सूर्योदय (06:46) से होता है।
रवि 29 दिसंबर और सोम 30 दिसंबर क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी रवि 29 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 30 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:05 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:05 से 02:45 सोम तक।
एकादशी 02:45 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 29 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:39: रवि 29 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 29 दिसंबर को दशमी 05:05 तक है, अरुणोदय (05:03–06:39) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:45 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 30 दिसंबर को व्रत रखते हैं: सोम 30 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 30 दिसंबर, 08:10–19:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 30 दिसंबर 02:45 से मंगल 31 दिसंबर 00:25 तक है; हरिवासर 08:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:18 तक, करते हैं।
वैष्णव · मंगल 31 दिसंबर, 06:40–19:51 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 31 दिसंबर को 00:25 पर, रात में, अरुणोदय (05:04) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:40) से सूर्यास्त (19:51) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।