Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 2000 2000 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 2000 कब है?
2000 में दो बार
शनिवार 1 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 1 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 21 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 2 जनवरी
शुक्रवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शनि 1 जनवरी
-
06:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 2 जनवरी
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12:27–19:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
गुरु 21 दिसंबर
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06:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 22 दिसंबर
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06:35–10:15पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शनि 1 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शनि 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:33 से 05:49 रवि तक।
अरुणोदय में एकादशी केवल 05:49 तक; फिर द्वादशी। एकादशी: 03:33 शनि से 05:49 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:40: शनि 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:33 पर, उससे (05:04–06:40) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 2 जनवरी, 12:27–19:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 2 जनवरी 05:49 से सोम 3 जनवरी 08:21 तक है; हरिवासर 12:27 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:19 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
गुरु 21 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 21 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 09:06 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 09:06 बुध से 09:25 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 21 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:35: गुरु 21 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 09:06 बुध पर, उससे (04:59–06:35) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 22 दिसंबर, 06:35–10:15
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 21 दिसंबर 09:25 से शुक्र 22 दिसंबर 10:15 तक है; हरिवासर 15:38 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 22 दिसंबर को सूर्योदय (06:35) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।