Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1997 1997 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−2 में
Ipameri में सफला एकादशी 1997 कब है?
1997 में दो बार
रविवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 5 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 25 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 25 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 6 जनवरी
शुक्रवार 26 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 5 जनवरी
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06:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 जनवरी
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06:44–11:06पारण समयव्रत खोलने का समय
गुरु 25 दिसंबर
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06:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 26 दिसंबर
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06:37–16:16पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी रवि 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 13:34 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 13:34 शनि से 12:45 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:43: रवि 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 13:34 शनि पर, उससे (05:07–06:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 जनवरी, 06:44–11:06
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 जनवरी 12:45 से सोम 6 जनवरी 11:06 तक है; हरिवासर 18:20 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 6 जनवरी को सूर्योदय (06:44) से होता है।
गुरु 25 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 25 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 13:48 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 13:48 बुध से 15:23 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:37: गुरु 25 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 13:48 बुध पर, उससे (05:01–06:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 26 दिसंबर, 06:37–16:16
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 25 दिसंबर 15:23 से शुक्र 26 दिसंबर 16:16 तक है; हरिवासर 21:36 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 26 दिसंबर को सूर्योदय (06:37) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:16 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।