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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1994 1994 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 1994 कब है?

1994 में दो बार

शुक्रवार 7 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 7 जनवरी का पूरा पंचांग

बुधवार 28 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 28 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 8 जनवरी

पारण समय
08:34–19:53
11 घं 19 मि · Tithika की परिपाटी

गुरुवार 29 दिसंबर

पारण समय
06:39–18:51
12 घं 12 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शुक्र 7 जनवरी

  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 8 जनवरी
  • 08:34–19:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

बुध 28 दिसंबर

  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 29 दिसंबर
  • 06:39–18:51पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शुक्र 7 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शुक्र 7 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:57 से 03:01 शनि तक।

एकादशी 03:01 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:57 शुक्र से 03:01 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 7 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:44: शुक्र 7 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:57 पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 8 जनवरी, 08:34–19:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 8 जनवरी 03:01 से रवि 9 जनवरी 01:12 तक है; हरिवासर 08:34 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:23 तक, करते हैं।

बुध 28 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी बुध 28 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:32 से 21:53 तक।

एकादशी 21:53 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 28 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:38: बुध 28 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:32 पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 29 दिसंबर, 06:39–18:51

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 28 दिसंबर 21:53 से गुरु 29 दिसंबर 18:51 तक है; हरिवासर 03:07 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 29 दिसंबर को सूर्योदय (06:39) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:17 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।