Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1983 1983 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1983 कब है?
1983 में दो बार
रविवार 9 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 9 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 29 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 29 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 10 जनवरी
शुक्रवार 30 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 9 जनवरी
-
05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 10 जनवरी
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05:46–18:15पारण समयव्रत खोलने का समय
गुरु 29 दिसंबर
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05:39व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 30 दिसंबर
-
06:04–18:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 9 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी रवि 9 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:25 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:25 शनि से 16:06 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 9 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:46: रवि 9 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:25 शनि पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 10 जनवरी, 05:46–18:15
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 9 जनवरी 16:06 से सोम 10 जनवरी 18:15 तक है; हरिवासर 22:39 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 10 जनवरी को सूर्योदय (05:46) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:24 तक, करते हैं।
गुरु 29 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 29 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:37 से 00:05 शुक्र तक।
एकादशी 00:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 29 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:39: गुरु 29 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:37 पर, उससे (04:03–05:39) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 30 दिसंबर, 06:04–18:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 30 दिसंबर 00:05 से शनि 31 दिसंबर 00:00 तक है; हरिवासर 06:04 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।