Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1981 1981 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1981 कब है?
1981 में दो बार
गुरुवार 1 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 1 जनवरी का पूरा पंचांगसोमवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 21 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 2 जनवरी
मंगलवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
गुरु 1 जनवरी
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05:41व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 2 जनवरी
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06:33–18:51पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सोम 21 दिसंबर
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05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 22 दिसंबर
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05:35–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
गुरु 1 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी गुरु 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:50 बुध से 00:05 शुक्र तक।
एकादशी 00:05 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:41: गुरु 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:50 बुध पर, उससे (04:05–05:41) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 2 जनवरी, 06:33–18:51 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 2 जनवरी 00:05 से शनि 3 जनवरी 01:55 तक है; हरिवासर 06:33 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:51) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:19 तक, करते हैं।
सोम 21 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी सोम 21 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:30 रवि से 20:49 तक।
एकादशी 20:49 सोम पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 21 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:35: सोम 21 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:30 रवि पर, उससे (03:59–05:35) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 22 दिसंबर, 05:35–18:47 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 21 दिसंबर 20:49 से मंगल 22 दिसंबर 23:22 तक है; हरिवासर 03:27 पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 22 दिसंबर को सूर्योदय (05:35) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:47) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:14 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।