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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1967 1967 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−2 में

Ipameri में सफला एकादशी 1967 कब है?

1967 में दो बार

शुक्रवार 6 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 6 जनवरी का पूरा पंचांग

बुधवार 27 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 27 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 7 जनवरी

पारण समय
06:44–17:33
10 घं 49 मि

गुरुवार 28 दिसंबर

पारण समय
06:38–10:16
3 घं 38 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

शुक्र 6 जनवरी

  • 06:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 7 जनवरी
  • 06:44–17:33पारण समयव्रत खोलने का समय

बुध 27 दिसंबर

  • 06:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 28 दिसंबर
  • 06:38–10:16पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

शुक्र 6 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी शुक्र 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:01 गुरु से 18:40 तक।

एकादशी 18:40 शुक्र पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 06:44: शुक्र 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:01 गुरु पर, उससे (05:08–06:44) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 7 जनवरी, 06:44–17:33

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 6 जनवरी 18:40 से शनि 7 जनवरी 17:33 तक है; हरिवासर 00:23 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 7 जनवरी को सूर्योदय (06:44) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:22 तक, करते हैं।

बुध 27 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी बुध 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:43 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:43 मंगल से 13:06 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 06:38: बुध 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:43 मंगल पर, उससे (05:02–06:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 28 दिसंबर, 06:38–10:16

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 27 दिसंबर 13:06 से गुरु 28 दिसंबर 10:16 तक है; हरिवासर 18:23 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 28 दिसंबर को सूर्योदय (06:38) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।