Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1959 1959 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1959 कब है?
1959 में दो बार
सोमवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 5 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 26 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 26 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 6 जनवरी
रविवार 27 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
सोम 5 जनवरी
-
05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 6 जनवरी
-
05:44–09:37पारण समयव्रत खोलने का समय
शनि 26 दिसंबर
-
05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 27 दिसंबर
-
05:38–18:49पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
सोम 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी सोम 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 14:37 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 14:37 रवि से 12:10 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: सोम 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 14:37 रवि पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 6 जनवरी, 05:44–09:37
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 5 जनवरी 12:10 से मंगल 6 जनवरी 09:37 तक है; हरिवासर 17:32 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 6 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है।
शनि 26 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:58 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:58 शुक्र से 06:23 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: शनि 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:58 शुक्र पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 27 दिसंबर, 05:38–18:49 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 27 दिसंबर को 03:14 पर, रात में, अरुणोदय (04:02) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:38) से सूर्यास्त (18:49) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।