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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1956 1956 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1956 कब है?

1956 में दो बार

रविवार 8 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 8 जनवरी का पूरा पंचांग

गुरुवार 27 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में गुरु 27 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 9 जनवरी

पारण समय
05:45–15:53
10 घं 8 मि

शुक्रवार 28 दिसंबर

पारण समय
05:39–18:32
12 घं 54 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

रवि 8 जनवरी

  • 05:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 9 जनवरी
  • 05:45–15:53पारण समयव्रत खोलने का समय

गुरु 27 दिसंबर

  • 05:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शुक्रवार 28 दिसंबर
  • 05:39–18:32पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

रवि 8 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी रवि 8 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:56 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:56 शनि से 13:15 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 8 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:45: रवि 8 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:56 शनि पर, उससे (04:09–05:45) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 9 जनवरी, 05:45–15:53

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 8 जनवरी 13:15 से सोम 9 जनवरी 15:53 तक है; हरिवासर 19:55 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 9 जनवरी को सूर्योदय (05:45) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:23 तक, करते हैं।

गुरु 27 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी गुरु 27 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:28 बुध से 17:45 तक।

एकादशी 17:45 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 27 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:38: गुरु 27 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:28 बुध पर, उससे (04:02–05:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 28 दिसंबर, 05:39–18:32

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 27 दिसंबर 17:45 से शुक्र 28 दिसंबर 18:32 तक है; हरिवासर 23:57 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 28 दिसंबर को सूर्योदय (05:39) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।