tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1948 1948 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1948 कब है?

1948 में दो बार

मंगलवार 6 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 6 जनवरी का पूरा पंचांग

रविवार 26 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 26 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 7 जनवरी

पारण समय
05:44–18:53
13 घं 9 मि · Tithika की परिपाटी

सोमवार 27 दिसंबर

पारण समय
05:38–07:47
2 घं 9 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

मंगल 6 जनवरी

  • 05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 7 जनवरी
  • 05:44–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

रवि 26 दिसंबर

  • 05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 27 दिसंबर
  • 05:38–07:47पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

मंगल 6 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी मंगल 6 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 20:02 सोम से 21:01 तक।

एकादशी 21:01 मंगल पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 6 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: मंगल 6 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 20:02 सोम पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 7 जनवरी, 05:44–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 6 जनवरी 21:01 से बुध 7 जनवरी 22:29 तक है; हरिवासर 03:23 पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 7 जनवरी को सूर्योदय (05:44) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:22 तक, करते हैं।

रवि 26 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी रवि 26 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 10:02 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 10:02 शनि से 08:47 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 26 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:37: रवि 26 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 10:02 शनि पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 27 दिसंबर, 05:38–07:47

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 26 दिसंबर 08:47 से सोम 27 दिसंबर 07:47 तक है; हरिवासर 14:32 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 27 दिसंबर को सूर्योदय (05:38) से होता है।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।