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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1935 1935 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1935 कब है?

1935 में दो बार

मंगलवार 1 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 1 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 21 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 21 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 2 जनवरी

पारण समय
05:41–10:26
4 घं 45 मि

रविवार 22 दिसंबर

पारण समय
05:35–15:25
9 घं 50 मि

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

मंगल 1 जनवरी

  • 05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 2 जनवरी
  • 05:41–10:26पारण समयव्रत खोलने का समय

शनि 21 दिसंबर

  • 05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 22 दिसंबर
  • 05:35–15:25पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

मंगल 1 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी मंगल 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:46 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:46 सोम से 11:59 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:40: मंगल 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:46 सोम पर, उससे (04:04–05:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 2 जनवरी, 05:41–10:26

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 1 जनवरी 11:59 से बुध 2 जनवरी 10:26 तक है; हरिवासर 17:36 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 2 जनवरी को सूर्योदय (05:41) से होता है।

शनि 21 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 21 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 12:47 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 12:47 शुक्र से 14:24 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 21 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:34: शनि 21 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 12:47 शुक्र पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 22 दिसंबर, 05:35–15:25

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 21 दिसंबर 14:24 से रवि 22 दिसंबर 15:25 तक है; हरिवासर 20:39 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 22 दिसंबर को सूर्योदय (05:35) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।