Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1921 1921 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1921 कब है?
1921 में दो बार
मंगलवार 4 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में मंगल 4 जनवरी का पूरा पंचांगशनिवार 24 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 24 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
बुधवार 5 जनवरी
रविवार 25 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
मंगल 4 जनवरी
-
05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 5 जनवरी
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05:43–18:52पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
शनि 24 दिसंबर
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05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 25 दिसंबर
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07:14–18:48पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
मंगल 4 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी मंगल 4 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 15:13 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 15:13 सोम से 16:56 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 4 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:43: मंगल 4 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 15:13 सोम पर, उससे (04:07–05:43) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · बुध 5 जनवरी, 05:43–18:52 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 4 जनवरी 16:56 से बुध 5 जनवरी 19:02 तक है; हरिवासर 23:27 मंगल पर पूरा होता है। इसलिए पारण बुध 5 जनवरी को सूर्योदय (05:43) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:52) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:21 तक, करते हैं।
शनि 24 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी शनि 24 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:52 से 01:18 रवि तक।
एकादशी 01:18 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 24 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:36: शनि 24 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:52 पर, उससे (04:00–05:36) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 25 दिसंबर, 07:14–18:48 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 25 दिसंबर 01:18 से सोम 26 दिसंबर 01:05 तक है; हरिवासर 07:14 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:48) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।