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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1918 1918 में 2 तारीख़ें

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में सफला एकादशी 1918 कब है?

1918 में दो बार

मंगलवार 8 जनवरी

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में मंगल 8 जनवरी का पूरा पंचांग

शनिवार 28 दिसंबर

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 28 दिसंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 9 जनवरी

पारण समय
07:03–18:53
11 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

रविवार 29 दिसंबर

पारण समय
06:53–18:50
11 घं 57 मि · Tithika की परिपाटी

सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण

मंगल 8 जनवरी

  • 05:45व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 9 जनवरी
  • 07:03–18:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

शनि 28 दिसंबर

  • 05:38व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 29 दिसंबर
  • 06:53–18:50पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंसफला एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?

चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।

मंगल 8 जनवरी क्यों?

सफला एकादशी मंगल 8 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 00:46 से 01:09 बुध तक।

एकादशी 01:09 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 8 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:45: मंगल 8 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 00:46 पर, उससे (04:09–05:45) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 9 जनवरी, 07:03–18:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 9 जनवरी 01:09 से गुरु 10 जनवरी 00:46 तक है; हरिवासर 07:03 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:23 तक, करते हैं।

शनि 28 दिसंबर क्यों?

सफला एकादशी शनि 28 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:55 शुक्र से 00:22 रवि तक।

एकादशी 00:22 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 28 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:38: शनि 28 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:55 शुक्र पर, उससे (04:02–05:38) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 29 दिसंबर, 06:53–18:50 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 29 दिसंबर 00:22 से सोम 30 दिसंबर 02:26 तक है; हरिवासर 06:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:50) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:17 तक, करते हैं।

नियम

पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।