Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1916 1916 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1916 कब है?
1916 में दो बार
शनिवार 1 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 1 जनवरी का पूरा पंचांगस्मार्त
बुधवार 20 दिसंबर
वैष्णव
गुरुवार 21 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में बुध 20 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
रविवार 2 जनवरी
स्मार्त · गुरुवार 21 दिसंबर
वैष्णव · शुक्रवार 22 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
शनि 1 जनवरी
-
05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 2 जनवरी
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05:41–12:39पारण समयव्रत खोलने का समय
बुध 20 दिसंबर
स्मार्त
- बुधवार 20 दिसंबर
-
05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 21 दिसंबर
-
09:08–18:46पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- गुरुवार 21 दिसंबर
-
05:35व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 22 दिसंबर
-
05:35–18:47पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
शनि 1 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी शनि 1 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 18:24 शुक्र से 15:47 तक।
एकादशी 15:47 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 1 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:40: शनि 1 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 18:24 शुक्र पर, उससे (04:04–05:40) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · रवि 2 जनवरी, 05:41–12:39
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 1 जनवरी 15:47 से रवि 2 जनवरी 12:39 तक है; हरिवासर 21:00 शनि पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 2 जनवरी को सूर्योदय (05:41) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:19 तक, करते हैं।
बुध 20 दिसंबर और गुरु 21 दिसंबर क्यों?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में सफला एकादशी बुध 20 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव गुरु 21 दिसंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:27 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:27 से 03:33 गुरु तक।
एकादशी 03:33 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:27 बुध से 03:33 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 20 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:34: बुध 20 दिसंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। बुध 20 दिसंबर को दशमी 04:27 तक है, अरुणोदय (03:58–05:34) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:33 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव गुरु 21 दिसंबर को व्रत रखते हैं: गुरु 21 दिसंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · गुरु 21 दिसंबर, 09:08–18:46 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 21 दिसंबर 03:33 से शुक्र 22 दिसंबर 01:53 तक है; हरिवासर 09:08 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:46) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:13 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · शुक्र 22 दिसंबर, 05:35–18:47 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी शुक्र 22 दिसंबर को 01:53 पर, रात में, अरुणोदय (03:59) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:35) से सूर्यास्त (18:47) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।