Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में सफला एकादशी 1902 1902 में 2 तारीख़ें
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में सफला एकादशी 1902 कब है?
1902 में दो बार
रविवार 5 जनवरी
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 5 जनवरी का पूरा पंचांगगुरुवार 25 दिसंबर
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में गुरु 25 दिसंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 6 जनवरी
शुक्रवार 26 दिसंबर
सफला एकादशी का समय: व्रत, पारण
रवि 5 जनवरी
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05:43व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 जनवरी
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05:44–12:40पारण समयव्रत खोलने का समय
गुरु 25 दिसंबर
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05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 26 दिसंबर
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05:37–10:53पारण समयव्रत खोलने का समय
सफला एकादशी इन तारीख़ों पर क्यों है?
चांद्र तिथि हर साल लगभग 11 दिन पहले आती है, जब तक कोई अधिक मास उसे फिर आगे न कर दे। जनवरी के शुरू में पड़ने वाली तिथि पिछले दिसंबर में जा सकती है, इसलिए किसी वर्ष में दो बार और अगले में एक बार भी नहीं।
रवि 5 जनवरी क्यों?
सफला एकादशी रवि 5 जनवरी को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:08 से। एकादशी: 07:08 से 09:56 रवि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 07:08 शनि से 09:56 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 5 जनवरी को सूर्योदय पर है, 05:37: रवि 5 जनवरी। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 07:08 शनि पर, उससे (04:01–05:37) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 6 जनवरी, 05:44–12:40
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 जनवरी 09:56 से सोम 6 जनवरी 12:34 तक है; हरिवासर 16:35 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 6 जनवरी को सूर्योदय (05:37) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं।
गुरु 25 दिसंबर क्यों?
सफला एकादशी गुरु 25 दिसंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:48 से। एकादशी: 06:48 से 08:36 गुरु तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:48 बुध से 08:36 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 25 दिसंबर को सूर्योदय पर है, 05:30: गुरु 25 दिसंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 06:48 बुध पर, उससे (03:54–05:30) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 26 दिसंबर, 05:37–10:53
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 25 दिसंबर 08:36 से शुक्र 26 दिसंबर 10:47 तक है; हरिवासर 15:08 गुरु पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 26 दिसंबर को सूर्योदय (05:31) से होता है।
नियम
पौष कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।