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ख़िरदालान, अज़रबैजान में रमा एकादशी 2027 पारण समय 07:17⁠–⁠17:45, मंगल 26 अक्टूबर

व्रत · समय UTC+4 में

ख़िरदालान में रमा एकादशी 2027 कब है?

सोमवार 25 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

ख़िरदालान में सोम 25 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

मंगलवार 26 अक्टूबर

पारण समय
07:17–17:45
10 घं 28 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • सोमवार 25 अक्टूबर
  • 07:02व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 26 अक्टूबर
  • 07:17–17:45पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

ख़िरदालान में रमा एकादशी सोम 25 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी सोम 25 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:10 से 01:52 मंगल तक।

एकादशी 01:52 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC+4)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल सोम 25 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 07:02: सोम 25 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 04:10 पर, उससे (05:26–07:02) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · मंगल 26 अक्टूबर, 07:17–17:45 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 अक्टूबर 01:52 से मंगल 26 अक्टूबर 23:34 तक है; हरिवासर 07:17 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:45) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:11 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।