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धिंग, असम में रमा एकादशी 2027 सोम 25 अक्टूबर या मंगल 26 अक्टूबर

असम, भारत

व्रत · समय IST में

धिंग में रमा एकादशी 2027 कब है?

स्मार्त

सोमवार 25 अक्टूबर

वैष्णव

मंगलवार 26 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

धिंग में सोम 25 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

स्मार्त · मंगलवार 26 अक्टूबर

पारण समय
08:47–16:42
7 घं 55 मि · Tithika की परिपाटी

वैष्णव · बुधवार 27 अक्टूबर

पारण समय
05:25–16:41
11 घं 16 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

स्मार्त

  • सोमवार 25 अक्टूबर
  • 05:24व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • मंगलवार 26 अक्टूबर
  • 08:47–16:42पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी

वैष्णव

  • मंगलवार 26 अक्टूबर
  • 05:25व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 27 अक्टूबर
  • 05:25–16:41पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

धिंग में रमा एकादशी सोम 25 अक्टूबर या मंगल 26 अक्टूबर को क्यों है?

स्मार्त · स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी सोम 25 अक्टूबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव मंगल 26 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:40 से। एकादशी: 05:40 से 03:22 मंगल तक।

एकादशी 03:22 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:40 सोम से 03:22 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह सोम 25 अक्टूबर को 05:40 पर, उस सूर्योदय (05:24) के बाद, लगती है और मंगल 26 अक्टूबर को 03:22 पर, अगले सूर्योदय (05:25 मंगल) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: सोम 25 अक्टूबर।

वैष्णव

वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। सोम 25 अक्टूबर को अरुणोदय (03:48–05:24) में दशमी है। मंगल 26 अक्टूबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:22 तक, फिर द्वादशी): मंगल 26 अक्टूबर।

व्रत का पारण

स्मार्त · मंगल 26 अक्टूबर, 08:47–16:42 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी मंगल 26 अक्टूबर 03:22 से बुध 27 अक्टूबर 01:04 तक है; हरिवासर 08:47 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (16:42) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:40 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

वैष्णव · बुध 27 अक्टूबर, 05:25–16:41 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी बुध 27 अक्टूबर को 01:04 पर, रात में, अरुणोदय (03:49) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:25) से सूर्यास्त (16:41) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।