Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 2085 पारण समय 05:43–08:51, सोम 15 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में रमा एकादशी 2085 कब है?
रविवार 14 अक्टूबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 14 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 15 अक्टूबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- रविवार 14 अक्टूबर
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05:44व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 15 अक्टूबर
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05:43–08:51पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में रमा एकादशी रवि 14 अक्टूबर को क्यों है?
रमा एकादशी रवि 14 अक्टूबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:55 से 06:28 रवि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:55 शनि से 06:28 तक।
द्वादशी: 06:28 रवि से 08:51 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 13 अक्टूबर को 05:44 और रवि 14 अक्टूबर को 05:44। एकादशी (शनि 13 अक्टूबर 03:55 से रवि 14 अक्टूबर 06:28 तक) और द्वादशी (रवि 14 अक्टूबर 06:28 से सोम 15 अक्टूबर 08:51 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 14 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दो सूर्योदयों पर हो तो वे भी दूसरे दिन व्रत रखते हैं।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 15 अक्टूबर, 05:43–08:51
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 14 अक्टूबर 06:28 से सोम 15 अक्टूबर 08:51 तक है; हरिवासर 13:04 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 15 अक्टूबर को सूर्योदय (05:43) से होता है।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।