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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 2079 पारण समय 05:39⁠–⁠14:35, शनि 21 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में रमा एकादशी 2079 कब है?

शुक्रवार 20 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शुक्र 20 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

शनिवार 21 अक्टूबर

पारण समय
05:39–14:35
8 घं 56 मि

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शुक्रवार 20 अक्टूबर
  • 05:40व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • शनिवार 21 अक्टूबर
  • 05:39–14:35पारण समयव्रत खोलने का समय
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी शुक्र 20 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी शुक्र 20 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 16:14 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 16:14 गुरु से 15:12 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शुक्र 20 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:40: शुक्र 20 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 16:14 गुरु पर, उससे (04:04–05:40) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · शनि 21 अक्टूबर, 05:39–14:35

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शुक्र 20 अक्टूबर 15:12 से शनि 21 अक्टूबर 14:35 तक है; हरिवासर 21:03 शुक्र पर पूरा होता है। इसलिए पारण शनि 21 अक्टूबर को सूर्योदय (05:39) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:10 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।