Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 2045 शनि 4 नवंबर या रवि 5 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में रमा एकादशी 2045 कब है?
स्मार्त
शनिवार 4 नवंबर
वैष्णव
रविवार 5 नवंबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में शनि 4 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · रविवार 5 नवंबर
वैष्णव · सोमवार 6 नवंबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शनिवार 4 नवंबर
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05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 5 नवंबर
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08:54–18:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- रविवार 5 नवंबर
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05:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 6 नवंबर
-
05:31–18:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में रमा एकादशी शनि 4 नवंबर या रवि 5 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी शनि 4 नवंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव रवि 5 नवंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 05:51 से। एकादशी: 05:51 से 03:30 रवि तक।
एकादशी 03:30 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:51 शनि से 03:30 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शनि 4 नवंबर को 05:51 पर, उस सूर्योदय (05:32) के बाद, लगती है और रवि 5 नवंबर को 03:30 पर, अगले सूर्योदय (05:31 रवि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शनि 4 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शनि 4 नवंबर को अरुणोदय (03:56–05:32) में दशमी है। रवि 5 नवंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 03:30 तक, फिर द्वादशी): रवि 5 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · रवि 5 नवंबर, 08:54–18:21 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 5 नवंबर 03:30 से सोम 6 नवंबर 01:07 तक है; हरिवासर 08:54 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:21) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:05 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · सोम 6 नवंबर, 05:31–18:21 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी सोम 6 नवंबर को 01:07 पर, रात में, अरुणोदय (03:55) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:31) से सूर्यास्त (18:21) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।