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Pāthardi, महाराष्ट्र में रमा एकादशी 2028 पारण समय 06:23⁠–⁠18:06, रवि 15 अक्टूबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में

Pāthardi में रमा एकादशी 2028 कब है?

शनिवार 14 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में शनि 14 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 15 अक्टूबर

पारण समय
06:23–18:06
11 घं 43 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 14 अक्टूबर
  • 06:23व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 15 अक्टूबर
  • 06:23–18:06पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में रमा एकादशी शनि 14 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी शनि 14 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 01:13 से 22:29 तक।

एकादशी 22:29 शनि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 14 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 06:23: शनि 14 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 01:13 पर, उससे (04:47–06:23) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 15 अक्टूबर, 06:23–18:06 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 14 अक्टूबर 22:29 से रवि 15 अक्टूबर 19:17 तक है; हरिवासर 03:41 पर पूरा होता है। इसलिए पारण रवि 15 अक्टूबर को सूर्योदय (06:23) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:06) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:44 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।