Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1980 पारण समय 05:32–10:15, मंगल 4 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में रमा एकादशी 1980 कब है?
सोमवार 3 नवंबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में सोम 3 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 4 नवंबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 3 नवंबर
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05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 4 नवंबर
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05:32–10:15पारण समयव्रत खोलने का समय
Ipameri में रमा एकादशी सोम 3 नवंबर को क्यों है?
रमा एकादशी सोम 3 नवंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:20 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:20 से 07:41 सोम तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:20 रवि से 07:41 तक।
द्वादशी: 07:41 सोम से 10:15 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 2 नवंबर को 05:33 और सोम 3 नवंबर को 05:32। एकादशी (रवि 2 नवंबर 05:20 से सोम 3 नवंबर 07:41 तक) और द्वादशी (सोम 3 नवंबर 07:41 से मंगल 4 नवंबर 10:15 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 3 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 2 नवंबर को दशमी 05:20 तक है, उसके भीतर (03:57–05:33); सोम 3 नवंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 4 नवंबर, 05:32–10:15
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 नवंबर 07:41 से मंगल 4 नवंबर 10:15 तक है; हरिवासर 14:20 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 4 नवंबर को सूर्योदय (05:32) से होता है।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।