tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1969 पारण समय 05:31⁠–⁠18:21, गुरु 6 नवंबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में रमा एकादशी 1969 कब है?

बुधवार 5 नवंबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में बुध 5 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

गुरुवार 6 नवंबर

पारण समय
05:31–18:21
12 घं 50 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • बुधवार 5 नवंबर
  • 05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • गुरुवार 6 नवंबर
  • 05:31–18:21पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी बुध 5 नवंबर को क्यों है?

रमा एकादशी बुध 5 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:24 मंगल से 22:26 तक।

एकादशी 22:26 बुध पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 5 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:32: बुध 5 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:24 मंगल पर, उससे (03:56–05:32) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · गुरु 6 नवंबर, 05:31–18:21 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 5 नवंबर 22:26 से गुरु 6 नवंबर 22:42 तक है; हरिवासर 04:30 पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 6 नवंबर को सूर्योदय (05:31) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:21) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:05 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।