tithika
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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1963 पारण समय 10:06⁠–⁠18:12, रवि 13 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में रमा एकादशी 1963 कब है?

शनिवार 12 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 12 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 13 अक्टूबर

पारण समय
10:06–18:12
8 घं 6 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 12 अक्टूबर
  • 05:46व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 13 अक्टूबर
  • 10:06–18:12पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी शनि 12 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी शनि 12 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:22 से 03:52 रवि तक।

एकादशी 03:52 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:22 शनि से 03:52 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 12 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:46: शनि 12 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:22 पर, उससे (04:10–05:46) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 13 अक्टूबर, 10:06–18:12 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 13 अक्टूबर 03:52 से सोम 14 अक्टूबर 04:47 तक है; हरिवासर 10:06 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:12) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:15 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।