tithika
English

Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1930 पारण समय 05:41⁠–⁠18:14, रवि 19 अक्टूबर

व्रत · समय UTC−3 में

Ipameri में रमा एकादशी 1930 कब है?

शनिवार 18 अक्टूबर

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में शनि 18 अक्टूबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

रविवार 19 अक्टूबर

पारण समय
05:41–18:14
12 घं 33 मि · Tithika की परिपाटी

रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • शनिवार 18 अक्टूबर
  • 05:42व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • रविवार 19 अक्टूबर
  • 05:41–18:14पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंरमा एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में रमा एकादशी शनि 18 अक्टूबर को क्यों है?

रमा एकादशी शनि 18 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 08:27 से।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 08:27 शुक्र से 05:43 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल शनि 18 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:42: शनि 18 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 08:27 शुक्र पर, उससे (04:06–05:42) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · रवि 19 अक्टूबर, 05:41–18:14 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)

द्वादशी रवि 19 अक्टूबर को 02:51 पर, रात में, अरुणोदय (04:05) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:41) से सूर्यास्त (18:14) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।

नियम

कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।