Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में रमा एकादशी 1902 रवि 26 अक्टूबर या सोम 27 अक्टूबर
व्रत · समय UTC−3 में
Ipameri में रमा एकादशी 1902 कब है?
स्मार्त
रविवार 26 अक्टूबर
वैष्णव
सोमवार 27 अक्टूबर
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
Ipameri में रवि 26 अक्टूबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 27 अक्टूबर
वैष्णव · मंगलवार 28 अक्टूबर
रमा एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 26 अक्टूबर
-
05:37व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 27 अक्टूबर
-
09:33–18:16पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 27 अक्टूबर
-
05:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 28 अक्टूबर
-
05:36–18:17पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Ipameri में रमा एकादशी रवि 26 अक्टूबर या सोम 27 अक्टूबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में रमा एकादशी रवि 26 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव सोम 27 अक्टूबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 04:13 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 04:13 से 03:30 सोम तक।
एकादशी 03:30 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 04:13 रवि से 03:30 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 26 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:31: रवि 26 अक्टूबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 26 अक्टूबर को दशमी 04:13 तक है, अरुणोदय (03:55–05:31) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 03:30 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव सोम 27 अक्टूबर को व्रत रखते हैं: सोम 27 अक्टूबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 27 अक्टूबर, 09:33–18:16 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 27 अक्टूबर 03:30 से मंगल 28 अक्टूबर 03:14 तक है; हरिवासर 09:26 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:10) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:02 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 28 अक्टूबर, 05:36–18:17 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 28 अक्टूबर को 03:14 पर, रात में, अरुणोदय (03:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (05:29) से सूर्यास्त (18:10) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक कृष्ण एकादशी (पूर्णिमान्त) · आश्विन कृष्ण एकादशी (अमान्त)
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।