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Pāthardi, महाराष्ट्र में देवउठनी एकादशी 2030 पारण समय 09:53⁠–⁠17:53, बुध 6 नवंबर

महाराष्ट्र, भारत

व्रत · समय IST में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं

Pāthardi में देवउठनी एकादशी 2030 कब है?

मंगलवार 5 नवंबर

कार्तिक शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Pāthardi में मंगल 5 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

बुधवार 6 नवंबर

पारण समय
09:53–17:53
8 घं 0 मि · Tithika की परिपाटी

देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • मंगलवार 5 नवंबर
  • 06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • बुधवार 6 नवंबर
  • 09:53–17:53पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवउठनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Pāthardi में देवउठनी एकादशी मंगल 5 नवंबर को क्यों है?

देवउठनी एकादशी मंगल 5 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 03:34 से 03:44 बुध तक।

एकादशी 03:44 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 03:34 मंगल से 03:44 तक।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 5 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:31: मंगल 5 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 03:34 पर, उससे (04:55–06:31) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · बुध 6 नवंबर, 09:53–17:53 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 6 नवंबर 03:44 से गुरु 7 नवंबर 04:23 तक है; हरिवासर 09:53 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (17:53) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:48 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।

नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।