Pāthardi, महाराष्ट्र में देवउठनी एकादशी 2021 पारण समय 06:37–08:02, मंगल 16 नवंबर
महाराष्ट्र, भारत
व्रत · समय IST में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Pāthardi में देवउठनी एकादशी 2021 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
मंगलवार 16 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- सोमवार 15 नवंबर
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06:36व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 16 नवंबर
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06:37–08:02पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2021 के पेज पर:
Pāthardi में देवउठनी एकादशी सोम 15 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी सोम 15 नवंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 05:48 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 से 06:40 सोम तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:48 रवि से 06:40 तक।
द्वादशी: 06:40 सोम से 08:02 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (IST)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, रवि 14 नवंबर को 06:36 और सोम 15 नवंबर को 06:36। एकादशी (रवि 14 नवंबर 05:48 से सोम 15 नवंबर 06:40 तक) और द्वादशी (सोम 15 नवंबर 06:40 से मंगल 16 नवंबर 08:02 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: सोम 15 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: रवि 14 नवंबर को दशमी 05:48 तक है, उसके भीतर (05:00–06:36); सोम 15 नवंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · मंगल 16 नवंबर, 06:37–08:02
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 15 नवंबर 06:40 से मंगल 16 नवंबर 08:02 तक है; हरिवासर 13:00 सोम पर पूरा होता है। इसलिए पारण मंगल 16 नवंबर को सूर्योदय (06:37) से होता है।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।