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Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 2021 पारण समय 05:29⁠–⁠18:26, सोम 15 नवंबर

व्रत · समय UTC−3 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं

Ipameri में देवउठनी एकादशी 2021 कब है?

रविवार 14 नवंबर

कार्तिक शुक्ल एकादशी

स्मार्त · वैष्णव

Ipameri में रवि 14 नवंबर का पूरा पंचांग

पारण का समय: व्रत कब खोलें?

सोमवार 15 नवंबर

पारण समय
05:29–18:26
12 घं 57 मि · Tithika की परिपाटी

देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण

  • रविवार 14 नवंबर
  • 05:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
  • सोमवार 15 नवंबर
  • 05:29–18:26पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
Tithika में खोलेंदेवउठनी एकादशी की तारीख़ अपने हर स्थान में देखें, साथ-साथ।

Ipameri में देवउठनी एकादशी रवि 14 नवंबर को क्यों है?

देवउठनी एकादशी रवि 14 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।

पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 21:18 शनि से 22:10 तक।

एकादशी 22:10 रवि पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।

हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।

स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल रवि 14 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:29: रवि 14 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 21:18 शनि पर, उससे (03:53–05:29) पहले, समाप्त हुई।

व्रत का पारण

स्मार्त · वैष्णव · सोम 15 नवंबर, 05:29–18:26 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)

पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 14 नवंबर 22:10 से सोम 15 नवंबर 23:32 तक है; हरिवासर 04:30 पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 15 नवंबर को सूर्योदय (05:29) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:26) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:04 तक, करते हैं।

नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी

एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।

स्मार्त
सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
वैष्णव
पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
व्रत का पारण
द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।