Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 2014 रवि 2 नवंबर या सोम 3 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 2014 कब है?
स्मार्त
रविवार 2 नवंबर
वैष्णव
सोमवार 3 नवंबर
कार्तिक शुक्ल एकादशी
Ipameri में रवि 2 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · सोमवार 3 नवंबर
वैष्णव · मंगलवार 4 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- रविवार 2 नवंबर
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06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 3 नवंबर
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10:10–19:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- सोमवार 3 नवंबर
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06:33व्रत आरंभसूर्योदय पर
- मंगलवार 4 नवंबर
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06:32–19:20पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2014 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी रवि 2 नवंबर या सोम 3 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवउठनी एकादशी रवि 2 नवंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव सोम 3 नवंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 07:09 से। एकादशी: 07:09 से 04:46 सोम तक।
एकादशी 04:46 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 07:09 रवि से 04:46 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह रवि 2 नवंबर को 07:09 पर, उस सूर्योदय (06:33) के बाद, लगती है और सोम 3 नवंबर को 04:46 पर, अगले सूर्योदय (06:33 सोम) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: रवि 2 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। रवि 2 नवंबर को अरुणोदय (04:57–06:33) में दशमी है। सोम 3 नवंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:46 तक, फिर द्वादशी): सोम 3 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · सोम 3 नवंबर, 10:10–19:19 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी सोम 3 नवंबर 04:46 से मंगल 4 नवंबर 02:24 तक है; हरिवासर 10:10 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:19) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:06 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · मंगल 4 नवंबर, 06:32–19:20 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी मंगल 4 नवंबर को 02:24 पर, रात में, अरुणोदय (04:56) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:32) से सूर्यास्त (19:20) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।