Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 2011 पारण समय 06:31–10:43, सोम 7 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 2011 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
सोमवार 7 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- रविवार 6 नवंबर
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06:31व्रत आरंभसूर्योदय पर
- सोमवार 7 नवंबर
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06:31–10:43पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2011 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी रवि 6 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी रवि 6 नवंबर को है: एकादशी और द्वादशी दोनों बढ़ी हैं, इसलिए स्मार्त बाद का दिन लेते हैं, और उसका अरुणोदय दशमी से मुक्त है।
दशमी 06:04 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:04 से 08:16 रवि तक।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 06:04 शनि से 08:16 तक।
द्वादशी: 08:16 रवि से 10:43 तक, अपने दिन से लंबी: यह भी बढ़ी है।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह दोनों सूर्योदयों पर है, शनि 5 नवंबर को 06:32 और रवि 6 नवंबर को 06:31। एकादशी (शनि 5 नवंबर 06:04 से रवि 6 नवंबर 08:16 तक) और द्वादशी (रवि 6 नवंबर 08:16 से सोम 7 नवंबर 10:43 तक) दोनों अपने दिन से लंबी हैं; दोनों बढ़ें तो स्मार्त बाद का दिन लेते हैं: रवि 6 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: शनि 5 नवंबर को दशमी 06:04 तक है, उसके भीतर (04:56–06:32); रवि 6 नवंबर को पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · सोम 7 नवंबर, 06:31–10:43
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी रवि 6 नवंबर 08:16 से सोम 7 नवंबर 10:43 तक है; हरिवासर 14:53 रवि पर पूरा होता है। इसलिए पारण सोम 7 नवंबर को सूर्योदय (06:31) से होता है।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।