Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 2007 मंगल 20 नवंबर या बुध 21 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 2007 कब है?
स्मार्त
मंगलवार 20 नवंबर
वैष्णव
बुधवार 21 नवंबर
कार्तिक शुक्ल एकादशी
Ipameri में मंगल 20 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · बुधवार 21 नवंबर
वैष्णव · गुरुवार 22 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- मंगलवार 20 नवंबर
-
06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- बुधवार 21 नवंबर
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08:01–19:29पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- बुधवार 21 नवंबर
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06:28व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 22 नवंबर
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06:28–19:29पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2007 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी मंगल 20 नवंबर या बुध 21 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवउठनी एकादशी मंगल 20 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर एकादशी है। वैष्णव बुध 21 नवंबर को व्रत रखते हैं।
दशमी 05:19 तक, अरुणोदय के भीतर; सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 05:19 से 02:48 बुध तक।
एकादशी 02:48 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 05:19 मंगल से 02:48 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल मंगल 20 नवंबर को सूर्योदय पर है, 06:28: मंगल 20 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। मंगल 20 नवंबर को दशमी 05:19 तक है, अरुणोदय (04:52–06:28) के भीतर, इसलिए वह एकादशी विद्ध है। एकादशी 02:48 पर समाप्त होती है, इसलिए वैष्णव बुध 21 नवंबर को व्रत रखते हैं: बुध 21 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · बुध 21 नवंबर, 08:01–19:29 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 21 नवंबर 02:48 से बुध 21 नवंबर 23:42 तक है; हरिवासर 08:01 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:29) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:04 तक, करते हैं।
वैष्णव · गुरु 22 नवंबर, 06:28–19:29 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी गुरु 22 नवंबर को 23:42 बुध पर, रात में, अरुणोदय (04:52) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:28) से सूर्यास्त (19:29) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।