Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 2005 शुक्र 11 नवंबर या शनि 12 नवंबर
व्रत · समय UTC−2 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 2005 कब है?
स्मार्त
शुक्रवार 11 नवंबर
वैष्णव
शनिवार 12 नवंबर
कार्तिक शुक्ल एकादशी
Ipameri में शुक्र 11 नवंबर का पूरा पंचांगपारण का समय: व्रत कब खोलें?
स्मार्त · शनिवार 12 नवंबर
वैष्णव · रविवार 13 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
स्मार्त
- शुक्रवार 11 नवंबर
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06:30व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शनिवार 12 नवंबर
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10:18–19:24पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
वैष्णव
- शनिवार 12 नवंबर
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06:29व्रत आरंभसूर्योदय पर
- रविवार 13 नवंबर
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06:29–19:24पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 2005 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी शुक्र 11 नवंबर या शनि 12 नवंबर को क्यों है?
स्मार्त · स्मार्त परंपरा में देवउठनी एकादशी शुक्र 11 नवंबर को है: एकादशी किसी सूर्योदय पर नहीं है, और क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है। वैष्णव शनि 12 नवंबर को व्रत रखते हैं।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 06:43 से। एकादशी: 06:43 से 04:45 शनि तक।
एकादशी 04:45 पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी। एकादशी: 06:43 शुक्र से 04:45 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−2)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं। यह शुक्र 11 नवंबर को 06:43 पर, उस सूर्योदय (06:30) के बाद, लगती है और शनि 12 नवंबर को 04:45 पर, अगले सूर्योदय (06:29 शनि) से पहले, समाप्त होती है: यह किसी सूर्योदय पर नहीं है। क्षय एकादशी उसी दिन रखी जाती है जिस दिन वह चलती है: शुक्र 11 नवंबर।
वैष्णव अरुणोदय देखते हैं, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट। शुक्र 11 नवंबर को अरुणोदय (04:54–06:30) में दशमी है। शनि 12 नवंबर को उसमें दशमी नहीं (एकादशी 04:45 तक, फिर द्वादशी): शनि 12 नवंबर।
व्रत का पारण
स्मार्त · शनि 12 नवंबर, 10:18–19:24 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी शनि 12 नवंबर 04:45 से रवि 13 नवंबर 02:55 तक है; हरिवासर 10:18 पर पूरा होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (19:24) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 09:04 तक, करते हैं; यहाँ यह समय हरिवासर से पहले समाप्त हो जाता है।
वैष्णव · रवि 13 नवंबर, 06:29–19:24 (त्रयोदशी, सूर्योदय से सूर्यास्त: Tithika की परिपाटी)
द्वादशी रवि 13 नवंबर को 02:55 पर, रात में, अरुणोदय (04:53) से पहले समाप्त होती है: रात में समाप्त द्वादशी को Tithika नहीं गिनता, उसकी परिपाटी। द्वादशी न हो तो निर्णयसिंधु पारण त्रयोदशी में कराता है: सूर्योदय (06:29) से सूर्यास्त (19:24) तक, क्योंकि पारण दिन का कर्म है: Tithika की परिपाटी।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।