Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 1968 पारण समय 05:33–18:19, शुक्र 1 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 1968 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
शुक्रवार 1 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- गुरुवार 31 अक्टूबर
-
05:34व्रत आरंभसूर्योदय पर
- शुक्रवार 1 नवंबर
-
05:33–18:19पारण समयव्रत खोलने का समय · Tithika की परिपाटी
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 1968 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी गुरु 31 अक्टूबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी गुरु 31 अक्टूबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 19:47 बुध से 20:01 तक।
एकादशी 20:01 गुरु पर समाप्त; अरुणोदय में द्वादशी।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल गुरु 31 अक्टूबर को सूर्योदय पर है, 05:34: गुरु 31 अक्टूबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 19:47 बुध पर, उससे (03:58–05:34) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · शुक्र 1 नवंबर, 05:33–18:19 (सूर्यास्त, Tithika की परिपाटी)
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी गुरु 31 अक्टूबर 20:01 से शुक्र 1 नवंबर 20:45 तक है; हरिवासर 02:12 पर पूरा होता है। इसलिए पारण शुक्र 1 नवंबर को सूर्योदय (05:33) से होता है। पारण दिन का कर्म है, इसलिए Tithika सूर्यास्त (18:19) पर समय समाप्त करता है: Tithika की परिपाटी। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 08:06 तक, करते हैं।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।