Ipameri, गोइयास, ब्राज़िल में देवउठनी एकादशी 1908 पारण समय 05:32–12:13, गुरु 5 नवंबर
व्रत · समय UTC−3 में · इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं
Ipameri में देवउठनी एकादशी 1908 कब है?
पारण का समय: व्रत कब खोलें?
गुरुवार 5 नवंबर
देवउठनी एकादशी का समय: व्रत, पारण
- बुधवार 4 नवंबर
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05:32व्रत आरंभसूर्योदय पर
- गुरुवार 5 नवंबर
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05:32–12:13पारण समयव्रत खोलने का समय
कथा, पूजा विधि और व्रत के नियम
हर शहर के लिए एक ही, देवउठनी एकादशी 1908 के पेज पर:
Ipameri में देवउठनी एकादशी बुध 4 नवंबर को क्यों है?
देवउठनी एकादशी बुध 4 नवंबर को है: उस दिन सूर्योदय पर और पूरे अरुणोदय में एकादशी है।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर दशमी; एकादशी 17:28 से।
पूरे अरुणोदय में और सूर्योदय पर एकादशी। एकादशी: 17:28 मंगल से 14:49 तक।
हर पंक्ति एक दिन, एक ही घड़ी पर (UTC−3)। पट्टी: तिथि। खाना: अरुणोदय। हल्की पट्टी: दिन; गहरी: रात। सूर्य: सूर्योदय।
स्मार्त एकादशी को सूर्योदय पर देखते हैं: यह केवल बुध 4 नवंबर को सूर्योदय पर है, 05:26: बुध 4 नवंबर। वैष्णव अरुणोदय देखते हैं: दशमी 17:28 मंगल पर, उससे (03:50–05:26) पहले, समाप्त हुई।
व्रत का पारण
स्मार्त · वैष्णव · गुरु 5 नवंबर, 05:32–12:13
पारण द्वादशी में होता है, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद और द्वादशी समाप्त होने से पहले। द्वादशी बुध 4 नवंबर 14:49 से गुरु 5 नवंबर 12:06 तक है; हरिवासर 20:08 बुध पर पूरा होता है। इसलिए पारण गुरु 5 नवंबर को सूर्योदय (05:25) से होता है। द्वादशी दोपहर के बाद तक है: धर्मसिंधु के अनुसार बहुत लोग पारण सूर्योदय के बाद के पहले 3 मुहूर्तों में, 07:59 तक, करते हैं।
नियम
कार्तिक शुक्ल एकादशी
एकादशी व्रत सूर्योदय से अगले दिन के पारण तक रहता है।
- स्मार्त
- सूर्योदय पर एकादशी; दो सूर्योदयों पर हो तो पहला दिन, या द्वादशी भी बढ़े तो दूसरा; किसी सूर्योदय पर न हो तो वह दिन जब वह चल रही हो (निर्णयसिंधु)।
- वैष्णव
- पूरे अरुणोदय में एकादशी, सूर्योदय से पहले के 96 मिनट, जिसे दशमी विद्ध न करे; दो सूर्योदयों पर हो तो दूसरा दिन।
- व्रत का पारण
- द्वादशी में, उसके पहले चौथाई (हरिवासर) के बाद।